*असफलता सीख है, हार नहीं” — गलगोटिया विश्वविद्यालय में जया किशोरी जी ने युवाओं को दिया जीवन का मंत्र*
*असफलता सीख है, हार नहीं” — गलगोटिया विश्वविद्यालय में जया किशोरी जी ने युवाओं को दिया जीवन का मंत्र*

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“असफलता सीख है, हार नहीं” — गलगोटिया विश्वविद्यालय में जया किशोरी जी ने युवाओं को दिया जीवन का मंत्र
(Ashish singhal)

ग्रेटर नोएडा, अप्रैल 2026: गलगोटिया विश्वविद्यालय में अमर उजाला द्वारा आयोजित “जीवाजली: विचारों से बदलाव तक” कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रसिद्ध कथावाचक एवं मोटिवेशनल स्पीकर जया किशोरी जी मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने भाग लिया और उनके विचारों से प्रेरित हुए।
अपने संबोधन में जया किशोरी जी ने जीवन के विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जीवन में समस्याएँ आना स्वाभाविक है, लेकिन उनसे भागने के बजाय उनका समाधान खोजना ही सही मार्ग है। कठिन परिस्थितियाँ ही व्यक्ति को मजबूत बनाती हैं और आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं।
उन्होंने दूसरों से तुलना को व्यक्ति की सबसे बड़ी कमजोरी बताते हुए कहा कि हर व्यक्ति की अपनी अलग यात्रा होती है। इसलिए स्वयं पर ध्यान केंद्रित करना और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहना आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि मोटिवेशन तभी सार्थक होता है, जब उसे व्यवहार में उतारा जाए। केवल सुनना पर्याप्त नहीं, बल्कि उस पर कार्य करना ही वास्तविक बदलाव लाता है।
रिश्तों के संदर्भ में उन्होंने कहा कि कई बार लोग सफलता या पद के लिए अपने संबंधों की उपेक्षा कर देते हैं, जबकि वास्तविक खुशी संतुलन बनाए रखने में है। उन्होंने विद्यार्थियों को समय के महत्व को समझाते हुए कहा कि समय एक बार चला जाए तो वापस नहीं आता, इसलिए प्रत्येक क्षण का सदुपयोग करना चाहिए।
जया किशोरी जी ने आत्म-संदेह को दूर कर आत्मविश्वास बनाए रखने, तथा जीवन के विभिन्न पहलुओं—शारीरिक स्वास्थ्य, खान-पान की आदतें, नींद का पैटर्न और मानसिक स्वास्थ्य—के संतुलन पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि “असफलता वास्तव में असफलता नहीं होती, बल्कि वह एक सीख होती है,” और जो व्यक्ति अपनी गलतियों से सीख लेता है, वही सफलता की ओर अग्रसर होता है।
उन्होंने युवाओं को समर्पण, प्रतिबद्धता और सकारात्मक सोच अपनाने की सलाह देते हुए कहा कि भावनाएँ अक्सर अल्पकालिक होती हैं, जबकि तर्क दीर्घकाल में मार्गदर्शन करता है, इसलिए निर्णय सोच-समझकर लेना चाहिए। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने ध्यान, आत्म-नियंत्रण और अनुशासन को जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपने प्रश्न प्रस्तुत किए, जिनका जया किशोरी जी ने सरल और प्रेरणादायक उत्तर दिया।
कार्यक्रम के समापन पर ध्रुव गलगोटिया ने जया किशोरी जी को स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। वहीं अमर उजाला, नोएडा के पुष्पेंद्र चौहान द्वारा भी उन्हें पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया।










