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ग्रेटर नॉएडा में विश्व हिन्दी दिवस का आयोजन हुआ गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में

ग्रेटर नॉएडा में विश्व हिन्दी दिवस का आयोजन हुआ गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में

आशीष सिंघल ग्रेटर नॉएडा
10 जनवरी, 2020 की गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के आदरणीय कुलपति महोदय प्रो. भगवती शर्मा ने शुभकामनाएँ देते हुए कहा, “सभी भारोपिय- अर्थात् भारत व यूरोप की भाषाओं की जननी कही जाने वाली और विश्व की प्राचीनतम व सर्वाधिक वैज्ञानिक भाषा संस्कृत की प्रियतम दुहिता – हिन्दी के इस विश्व दिवस को गौरव-पूर्वक मनाएँ” ।
10 जनवरी को विश्व हिन्दी दिवस के अवसर गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में विश्वविद्यालय में छात्रों को जागरूक करने के लिए रमाबाई अम्बेडकर महिला छात्रावास में व्याख्यान का आयोजन किया गया, छात्रों एवं प्राध्यापकों ने अपने अपने विचार प्रस्तुत किए ।
13 जनवरी, 2020 को भारतीय भाषा एवं साहित्य विभाग की ओर विश्वविद्यालय के छात्र एवं शिक्षकगणों में एक वाद-संवाद के रूप में सार्थक गोष्ठी का आयोजन हुआ । इस गोष्ठी की खास विशेषता यह रही कि सभा में उपस्थित समस्त लोगों ने हिन्दी की प्रोन्नति के विषय में अपने-अपने मत रखें तथा औपचारिकता से दूर हिन्दी को व्यावहारिक जीवन का अभिन्न हिस्सा माना । भारतीय भाषा एवं साहित्य विभाग की प्राध्यापिका डॉ. विभावरी ने ‘विश्व हिन्दी दिवस की आवश्यकता क्यों’ पर संक्षिप्त रूप से प्रकाश डाला । बौद्ध सभ्यता एवं संस्कृति अध्ययन विभाग के विशेषज्ञ डॉ. चन्द्रशेखर पासवान ने हिन्दी एवं बोली को एक साथ जोड़ते हुए कहा कि ‘घर में पिता हिन्दी बोल रहे होते हैं, तो रात में माँ पराली गा रही होती है, इसलिए हिन्दी और बोली दोनों साथ-साथ लिखित और मौखिक रूप से चलती हैं” । मनोविज्ञान विभाग के विशेषज्ञ डॉ. ए.पी. सिंह हिन्दी को मनोचिकित्सा की भाषा मानते हुए कहते हैं, “हिन्दी साहित्य से चिकित्सा में मदद मिलती है, जैसे कि मेवाड़ का युद्ध पढ़कर एक आशा और उत्साह से मन भर जाता है तो रश्मिरथी पढ़कर अंतर्द्वन्द्व से निकलने का रास्ता मिल जाता है” ।
भारतीय भाषा एवं साहित्य विभाग के विभागाध्यक्ष एवं भाषा विज्ञान के विशेषज्ञ डॉ. ओम प्रकाश ने कहा कि “भारोपिय परिवार में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा हिन्दी है, जो कि हमारी अस्मिता से जुड़ी है । यह इंटरनेट पर सर्वाधिक तेजी से बढ़ने वाली भाषा है” ।
इस अवसर पर विधि, न्याय एवं शासन संकाय की प्राध्यापिका डॉ. प्रियंका सिंह, विश्वविद्यालय की छात्राएँ आराध्या एवं जन्नत ने काव्य-पाठ किया ।
इस कार्यक्रम का संचालन एवं आयोजन डॉ. रेनू यादव एवं डॉ. दिवाकर गरवा ने किया तथा मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान संकाय की अधिष्ठाता की शुभकामनाओं के साथ प्रो. वन्दना पाण्डेय, डॉ. ज्ञानादित्या शाक्य, डॉ कीर्ति, डॉ. ओबैदुल गफ्फार, डॉ. रेहाना सुल्ताना, डॉ. विवेक मिश्रा, डॉ. संगीता वाधवा सहित विश्वविद्यालय के प्राध्यापक-गण एवं छात्र-छात्राओं ने उपस्थित होकर वाद-संवाद के माध्यम से इस कार्यक्रम को सार्थक आयाम तक पहुँचाया ।

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