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*गृह आधारित शिशु देखभाल कार्यक्रम आशा संगिनी व आशा ने घर-घर जाकर जाना नवजात शिशुओं का हाल*

*गृह आधारित शिशु देखभाल कार्यक्रम आशा संगिनी व आशा ने घर-घर जाकर जाना नवजात शिशुओं का हाल*

– नवजात सहित प्रसूता की देखभाल के बारे में दी परिजनों को जानकारी

(आशा शर्मा)

बुलंदशहर। गृह भ्रमण कार्यक्रम के तहत आशा संगिनी ने अपने क्षेत्र की आशा कार्यकर्ताओं के साथ नवजात शिशुओं के घर का भ्रमण किया। प्रसूता और नवजात की समुचित देखभाल के बारे में परिजनों को जानकारी दी। पहासू सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डा. मनोज कुमार ने बताया – क्षेत्र के गांव समसपुर, जयरामपुर, कीरतपुर, चौढेंरा, चौगानपुर और किशनपुर में आशा संगिनी समीना बेगम ने अपने क्षेत्र की आशा कार्यकर्ताओं के साथ नवजात शिशुओं के घर भ्रमण किया। इस  दौरान उन्होंने गांव में नवजात शिशुओं की देखभाल करने वाली आशा कार्यकर्ताओं का कौशल भी जाना।
आशा संगिनी समीना बेगम ने बताया – अधिकतर लोग यही जानते हैं कि आशा प्रसव व टीकाकरण में सहयोग करती हैं। आशा को भी चाहिए कि वह गांव में गर्भवती व नवजात शिशुओं का ख्याल रखें ताकि वह उस परिवार से जुड़ी रहें और कोई लक्षण आने पर स्वास्थ्य केंद्र जाने की सलाह दे सकें। उन्होंने प्रसूताओं को प्रसव के बाद पहले सप्ताह के महत्व को समझाया और साथ ही बच्चे के जन्म पर आशा के भ्रमण की जिम्मेदारी की जानकारी भी दी। आशा संगिनी ने बताया – नवजात के जन्म के पहले दिन, तीसरे दिन, सातवें दिन, चौदहवें दिन, 21वें दिन, 28वें दिन एवं 42वें दिन भ्रमण के दौरान आशा कार्यकर्ता परामर्श एवं सेवाएं प्रदान करती हैं।
नवजात शिशु की गृह आधारित देखभाल कार्यक्रम के अंतर्गत छह माह तक केवल स्तनपान, वजन, तापमान, हाइपोथर्मिया (ठंडा बुखार) तथा मां के खानपान पर विशेष ध्यान रखने की सलाह दी गई । इस अवसर पर एएनएम कंचन सिंह, आशा कार्यकर्ता सपना, आशा सरोज देवी, सुनीता देवी, ममता देवी, कृष्णा देवी, रामवती देवी मौजूद रहीं।
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बेहतर देखभाल से शिशु मृत्यु दर में आ सकती है कमी
कस्तूरबा गांधी जिला महिला अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) डा. ज्योत्सना कुमारी ने बताया – शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए नवजात शिशु की बेहतर देखभाल करना अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए आशा कार्यकर्ताओं को शिशु की देखभाल करने की सम्पूर्ण जानकारी होनी चाहिए। शिशु के शरीर के तापमान को मां के शरीर की गर्मी से संतुलित किया जाता है और नवजात शिशु के लिए पोषक तत्वों से युक्त माँ का पहला दूध अति आवश्यक है। मां का पहला, पीला और गाढ़ा दूध बच्चे के लिए टीके का काम करता है। नवजात शिशु के लिए छह माह तक सिर्फ मां का दूध ही संपूर्ण आहार है। उन्होंने आशा कार्यकर्ताओं से कहा कि वह गर्भवती  और उनके परिजनों को समझायें कि प्रसव सरकारी अस्पताल में ही करायें, ताकि प्रसव के दौरान किसी तरह की कोई समस्या न हो।

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