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*वर्दी में गुंडागर्दी पत्रकार से जूतों से मारने तक की कह डाली बात*

*वर्दी में गुंडागर्दी पत्रकार से जूतों से मारने तक की कह डाली बात*

*वर्दी में गुंडागर्दी पत्रकार से जूतों से मारने तक कि कह डाली बात*

*बड़ागांव थानाध्यक्ष से ज्यादा बोल बोला है दीवान साहब का*
संवाददाता वाराणसी


वाराणसी के थाना बड़ागांव पर गए खबर संकलन के लिए पत्रकार दीनदयाल सिंह को पुलिस प्रशासन के बृजेश सिंह दीवान साहब से पत्रकार ने बस इतनी सी बात क्या पूछा की सर आज जो मारपीट हुई है इसमें क्या कार्रवाई हुई इतने में दीवान साहब भड़क उठे और अपने वर्दी का रौब दिखाते हुए पत्रकार को अभद्रता के साथ बोलते हुए कहां की अभी तुम थाने के बाहर भाग जाओ नहीं तो तुम्हे दो मिनट में पत्रकारिता सिखा देंगे तुम मेरे बड़े अधिकारी हो जो मैं बतलाऊ तुरंत भाग जा नही तो अभी तुझे जूते से मारते हुए बाहर कर दूंगा। और तुम जैसे पत्रकार से मैं जूतों से बात करता हूँ और मेरा कुछ नहीं उखाड़ सकते । तब पत्रकार दीनदयाल सिंह ने बोला सर कि मैंने आप से सिर्फ जानकारी मांगी आप मुझे कैसे बोल रहे हैं मैं एक पत्रकार हुँ। यह तो मेरा उत्तरदायित्व है। इतने में दीवान साहब आग बबूला होते हुए वर्दी के आड़ में यह तक भी कह डाले की तुम अभी चले जाओ नहीं तो तुम्हें भी इस मुकदमे में तुम्हारा नाम डालकर तुम्हें अंदर कर दूंगा और तुम्हारे ऊपर फर्जी मुकदमा कर के भेज दूंगा जेल और तुम मेरा कुछ नहीं कर सकते इस थाने पर मेरी ही चलती है। जब पत्रकार ने इसकी शिकायत उच्च अधिकारियो व थानाध्यक्ष से की तो पत्रकार को सिर्फ यह सांत्वना देते हुए कहा की उस दिवान पर कर्यवाही होगी और कहा कि जो भी लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का हनन करेगे उसे भी झोड़ा नही जायेगा ये कहना है आलाअधिकारियों का लेकिन पत्रकार का कहना है अभी तक सब बात हवा हवाई निकली अभी तक कुछ हुआ नही पत्रकार का कहना है कि मैं कप्तान साहब से व माननीय मुख्यमंत्री जी के पास तक जाऊंगा। क्योकि जहा एक तरफ माननीय मुख्यमंत्री जी का आदेश है की पत्रकारों पर अभद्रता हम बर्दाश्त नहीं करेंगे पर पुलिस प्रशासन के द्वारा हमेशा पत्रकारों पर अत्याचार होता ही आ रहा है हमारे माननीय मुख्यमंत्री जी का बातों का अवहेलना किया जा रहा है माननीय प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र बड़ागांव थाने के दीवान साहब को न तो हमारे माननीय योगी जी डर है ना तो उनकी बातों का कोई असर है । इसलिए पत्रकार को फर्जी मुकदमा करने तक का बोल दिए जब इसकी सूचना उच्च अधिकारियों व थानाध्यक्ष से शिकायत किया गया तो सिर्फ सांत्वना तक सीमित रह गया। पत्रकार का कहना है कि बड़ागांव थाने में पत्रकार को कोई खबर तक नहीं बताने वाले होते हैं आखिर क्यों लेकिन वही दूसरी तरफ देखा जाये तो बड़ागांव में दलालो बोल बाला के साथ थाने में स्वागत किया जाता है प्रशासन के निगाह में पत्रकार बनना इतना खराब है तो नही करनी मुझे पत्रकारिता क्योंकि सिर्फ कहने के लिए है हम लोग लोकतंत्र के चौथे स्तंभ बाकी हनन तो रोज किया जाता है प्रशासन के द्वारा

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