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*दनकौर कस्बे में मचा हड़कंप, द्रोणाचार्य मंदिर में चल रहे निर्माण कार्य को पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने रोका*

*दनकौर कस्बे में मचा हड़कंप, द्रोणाचार्य मंदिर में चल रहे निर्माण कार्य को पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने रोका*

*द्रोणाचार्य मंदिर में चल रहे निर्माण कार्य को पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने रोका*
(आशीष सिंघल दनकौर)

दनकौर। कस्बे में स्थित ऐतिहासिक प्राचीन द्रोणाचार्य मंदिर में पिछले 2 दिनों से निर्माण कार्य किया जा रहा था। निर्माण कार्य को एक सरकारी संस्था सिडको द्वारा गौशाला समिति की देखरेख में कराया जा रहा था। जिसे मंगलवार को पुरातत्व विभाग मेरठ के अधिकारियों द्वारा रुकवा दिया गया है। साथ ही फिर से निर्माण कार्य शुरू करने पर गौशाला समिति के प्रबंधक पर कार्यवाही करने की चेतावनी दी है। इससे पहले पुरातत्व विभाग के अधिकारी मंदिर के 3 सौ मीटर के दायरे में निर्माण कार्य नहीं करने की चेतावनी दे चुके हैं। कस्बे के 6 लोगों को अवैध निर्माण कार्य करने पर नोटिस भेजे गए थे और मुकदमा भी दर्ज कराया हुआ है। विभाग के मुताबिक मंदिर के आसपास के दायरे में निर्माण व मरम्मत कार्य के लिए पुरातत्व विभाग से अनुमति लेनी होगी।

     वही पुरातत्व विभाग के मल्टी टास्क स्टॉफ़ के सदस्य शैवेंद्र कुमार ने मुकदमा दर्ज होने से बौखलाए लोगों पर मारपीट का आरोप लगाते हुए दनकौर पुलिस से शिकायत की है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।              द्रोण गौशाला समिति के प्रबंधक रजनीकांत अग्रवाल ने बताया कि द्रोणाचार्य मंदिर को पर्यटक स्थल घोषित किया गया था। जिसके लिए प्रदेश सरकार से करीब 70 लाख रुपए की धनराशि जेवर विधायक द्वारा दिलाई गई थी। जोकि एक सरकारी संस्था सिडको के खाते में आई थी। गौशाला समिति की देखरेख में सिडको कंपनी द्वारा मंदिर में मरम्मत कार्य कराया जा रहा था। पुरातत्व विभाग ने मंदिर में चल रहे निर्माण कार्य को रोक दिया है। जिसकी जानकारी पर्यटन विभाग व विधायक को दे दी गई है।

     विभाग के अधिकारी अधीक्षण पुरातत्व विधि डीबी गणनायक ने बताया कि दनकौर के द्रोणाचार्य मंदिर और तालाब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की संपत्ति है। इस संपत्ति से बिना विभाग की अनुमति लिए कोई भी व्यक्ति छेड़छाड़ नहीं कर सकता। साथ ही इसके आसपास की 300 मीटर के दायरे में भी लोगों को निर्माण कार्य के लिए विभाग से अनुमति लेनी होगी। जोकि एक सरल प्रक्रिया है। ऑनलाइन आवेदन करने के बाद मानकों के अनुसार अनुमति दी जाती है। द्रोणाचार्य मंदिर में निर्माण कार्य होने की जानकारी मिली थी। जिसके बाद उसे रुकवा दिया गया है। विभाग से अनुमति के बाद ही फिर से निर्माण कार्य शुरू हो सकेगा।

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