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*हिंदुस्तान की बेटियों ने बढ़ाया गौरव*

*हिंदुस्तान की बेटियों ने बढ़ाया गौरव*

(आशीष सिंघल ग्रेटर नोएडा)

साबित करती बेटियां भारत की बेटियों ने ओलंपिक खेलों की शुरुआत में ही अपने शानदार प्रदर्शन रजत पदक जीत लिया और खेलों के इस महाकुंभ में भारतीय परचम लहराया अपनी धमक का आगाज कर दिखाया कहीं अन्य महिला खिलाड़ी का भी बेहतर प्रदर्शन जारी दे सकेंगे निश्चित ही 67 पुरुष और 52 महिला खिलाड़ियों के साथ तो क्यों पहुंचे भारतीय दल से देशवासियों को बहुत आशाएं हैं पिछले कई वर्षों स्पोर्ट्स में बहुत मेहनत से अपना प्रदर्शन कर रहे हैं हमारा खेल प्रशासन यह समझ चुका है कि मात्र इच्छाशक्ति के बल सकती इसके लिए खिलाड़ियों की क्षमताओं का विकास उचित स्तर पर किया जाना जरूरी है ताकि शानदार परिणाम हासिल किए जा सके और भी ज्यादा से ज्यादा यही मंत्र विजय का सूत्र बन सकता है आने वाले दिनों में भी खेल परिणाम हमारे पक्ष में रहें इसके लिए भारतीय खिलाड़ियों को संयम आपसी तालमेल और जीत की उचित रणनीति बनाकर खेलना होगा मीराबाई जानू ने टोक्यो ओलंपिक में भारत का पहला पदक दिलाकर अपना नाम इतिहास के अक्षरों में दर्ज करा लिया लेकिन यहां तक का उनका सफर आसान नहीं था उन्होंने अपने जीवन में बड़ी मुश्किलों का सामना किया जो बाहर मेरा रोजाना प्रैक्टिस में आसानी से उठा लिया करती थी पिछले रियो ओलंपिक में उनके हाथ मानो बर्फ की तरह जम गई थे इससे उन्हें बहुत बड़ा धक्का लगा था यह सब होने के बाद वह अवसाद में चली गई थी मगर उन असफलताओं के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी जिसका परिणाम आज पूरी दुनिया देख रही है मीराबाई चालू ने पूरे भारत को गोरवान्वित किया है इसी तरह बहुत बेटियां आगे आना चाहती है पर देश का नाम रोशन करना चाहत है मगर आर्थिक स्थिति के कारण वह वहीं रुक जाती हैं मैं सरकार से और समाज से हाथ जोड़कर प्रार्थना करना चाहती हूं कि जो बेटियां या बेटे खेल जगत में आगे बढ़ना चाहते हैं अपने राष्ट्र का नाम ऊंचा करना चाहते हैं उनका साथ सभी को मिलकर देना होगा जिससे हमारा हिंदुस्तान स्पोर्ट्स में हर फील्ड के खेल में नंबर वन हो

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