ग्रेटर नोएडा

शिक्षा देने के साथ प्रवासी मजदूरों को उनके घर भिजवाने की जिम्मेदारी भी अच्छी तरह से निभा रहे गुरू जी।

शिक्षा देने के साथ प्रवासी मजदूरों को उनके घर भिजवाने की जिम्मेदारी भी अच्छी तरह से निभा रहे गुरू जी।

शिक्षा देने के साथ प्रवासी मजदूरों को उनके घर भिजवाने की जिम्मेदारी भी अच्छी तरह से निभा रहे गुरू जी।

सीनियर पत्रकार विवेक नागर की दनकौर रेलवे स्टेशन से कवरेज-

दनकौर रेलवे स्टेशन पर पिछले करीब 6 दिनों से प्रवासी मजदूरों को उनके घरों को भिजवाने की व्यवस्था संभाल रहे टीचर रोजाना करीब 18 घंटे की डयूटी करने के बाद भी थकान नहीं मान रहे है। उनका कहना है कि रोजाना परेशान लोगों को ट्रेन से उनके गृह जनपद को भिजवाने के बाद उनको काफी शांति मिल रही है। टीचरों का कहना है कि वह सभी प्रवासी मजदूरों को जब तक उनके गृह जनपद भेजा जाएगा। इसी प्रकार बिना थके हुए मैदान में डटकर अपना कर्तव्य निभाते रहेंगे।
शनिवार से दनकौर रेलवे स्टेशन से प्रवासी मजदूरों को लेकर श्रमिक ट्रेनें जा रही है। जहां पर व्यवस्था को संभालने के लिए टीचरों की भी डयूटी लगी हुई है। दनकौर रेलवे स्टेशन पर जेवर और दनकौर के टीचरों की भी डयूटी लगी हुई। जो अपनी डयूटी को रोजाना 15-18 घंटे बिना थके हुए कर रहे है। उनका कहना है कि परेशान लोगों को उनके घर भेज कर उनको बहुत सुकून मिलता है। जेवर निवासी प्रधानाध्यापक हरेंद्र शर्मा ने बताया कि उनके साथ उनके ब्लॉक के करीब 35 अन्य टीचरों की डयूटी दनकौर रेलवे स्टेशन पर लगी है। जो रोजाना 15-18 घंटे व्यवस्था संभालते है। उन्होंने बताया कि प्रत्येक कोच में पहुंचकर यात्रियों से भोजन और पानी समेत उनकी अन्य परेशानियों का समाधान करते है। दनकौर ब्लॉक के प्रधानाध्यापक मनीष तिवारी, उमेश राठी, निरंजन नागर, सतवीर नागर और अशोक कुमार ने बताया कि स्टेशन पर रोजाना 15-18 घंटे डयूटी करते है। जिसके चलते मात्र 2-3 घंटे की नींद लेते है। लेकिन थकान नहीं होती है। उन्होंने बताया कि परेशान लोगों की परेशानियों को ठीक करने के बाद उनकी थकान दूर हो जाती है। वही, दनकौर रेलवे स्टेशन की व्यवस्था को संभाल रहे जेवर ब्लॉक के खंड शिक्षा अधिकारी सुनील दत्त मुदग्गल 6 दिनों से यहां 24 घंटे की डयूटी करके भी थकान महसूस नही कर रहे है।

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